सीएसआईआर-निस्पर की उत्पत्ति
- सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-निस्पर), नई दिल्ली की उत्पत्ति दिनांक 01-04-2021 को हुई थी। यह संस्थान पूर्व दो राष्ट्रीय संस्थानों- सीएसआईआर-निस्केयर, नई दिल्ली तथा सीएसआईआर-निस्टैड्स, नई दिल्ली के विलय के पश्चात अस्तित्व में आया है। (सीएसआईआर कार्या. ज्ञापन सं. 5-1(762)/2021-पीडी, दिनांक 28-05-2021 देखिए)
- इसकी पहली बार घोषणा दिनांक 14-01-2021 को पूर्व केंद्रीय मंत्री, विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, डॉ. हर्ष वर्धन जी ने की थी।
- पूर्व सीएसआईआर-निस्केयर, नई दिल्ली तथा सीएसआईआर-निस्टैड्स, नई दिल्ली का नये संस्थान सीएसआईआर-निस्पर, नई दिल्ली के रूप में विलय के फलस्वरूप, सभी इकाइयों, विभागों का पुनर्गठन किया गया है।
- इन दोनों संस्थानों की कई दशकों की मजबूत विरासत है। इन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार प्रणाली में कई अलग-अलग तरीकों से योगदान दिया है। यह नया संस्थान, भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार प्रणाली के लिए “थिंक टैंक” के रूप में कार्य कर सकता है तथा उभरती हुई राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, संचार और नीति अध्ययन का नेतृत्व कर सकता है।
सीएसआईआर-निस्केयर की उत्पत्ति
- वर्ष 1942 में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् (सीएसआईआर) की स्थापना के समय परिषद के मैमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन में उल्लिखित प्रमुख उदृदेश्यों में वैज्ञानिक पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन एवं सूचना का संग्रह और प्रसार आदि शामिल थे।
- सीएसआईआर का एक बुनियादी अधिदेश (मेनडेट) न केवल अनुसंधान संबंधी वैज्ञानिक जानकारी का संग्रह और प्रसार से जुड़ा था, अपितु इसमें वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान और विकास पर वैज्ञानिक पत्रों और पत्रिकाओं का प्रकाशन भी शामिल था। पहले दशक (1942-1951) के दौरान, इस उत्तरदायित्व का दो स्वतंत्र इकाइयों- दी ऑफिस ऑफ दी डिक्शनरी ऑफ इंडिया रॉ मैटिरियल्स एंड इकोनोमिक प्रोडक्ट्स एंड दी जर्नल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च द्वारा निर्वहन किया गया। इन दोनों इकाइयों का विलय कर दिया गया तथा इसके फलस्वरूप, सीएसआईआर ने वर्ष 1951 में अतिरिक्त उत्तरदायित्व के साथ प्रकाशन और सूचना निदेशालय (पीआईडी) की स्थापना की। यह भारतीय वैज्ञानिक नेतृत्व की दूरदर्शिता के लिए एक श्रंद्धांजलि है जो विज्ञान संचार के महत्व को समझ सकता है और जो हाल के वर्षों में विश्वभर में चर्चा का विषय बन चुका है।
- प्रकाशन और सूचना निदेशालय (पीआईडी) का जन्म इस अहसास के साथ हुआ कि विज्ञान को जानकारों और न जानने वालों के बीच के अंतर को मिटाने की आवश्यकता है। वैज्ञानिक समुदाय के भीतर वैज्ञानिक जानकारी का प्रसार करना उतना ही महत्वपूर्ण था जिससे उनको जानकारी साझा करने में सहायता मिले और नई खोजों का नेतृत्व करने वाले विचारों में केंद्राभिमुकता (कन्वर्जेंस) लाई जा सके।
- सूचना एक मूल्यवान वस्तु बनने और विज्ञान संचार एक विविध और अंतर्विषयी क्षेत्र बन जाने के साथ प्रकाशन और सूचना निदेशालय को वर्ष 1996 में राष्ट्रीय विज्ञान संचार संस्थान (निस्कॉम), नई दिल्ली बना दिया गया।
- समानता तथा कुछ अतिव्यापी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए सीएसआईआर के तहत वर्ष 1952 में स्थापित हुई सूचना विज्ञान की एक और सहोदर प्रयोगशाला भारतीय वैज्ञानिक प्रलेखन केंद्र (इंस्डॉक), नई दिल्ली का राष्ट्रीय विज्ञान संचार संस्थान (निस्कॉम), नई दिल्ली में विलय कर दिया गया। जिसका विज्ञान संचार और सूचना संसाधन के राष्ट्रीय संस्थान के रूप में परिवर्तन हो गया।
- आज निस्केयर को देश में विज्ञान संचार में कार्यरत सर्वश्रेष्ठ संस्थान का स्थान प्राप्त है और शायद यह विश्व में कहीं और अपनी तरह का एकमात्र संस्थान है।
- पिछले लगभग 7 दशकों के दौरान, निस्केयर देश में एकमात्र राष्ट्रीय संस्थान के रूप में स्थापित हुआ है जो विज्ञान व प्रौद्योगिकी के प्रमुख विषयों पर तीन लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं समेत समकक्ष समीक्षित (पीअर रिव्यूड) 19 अनुसंधान पत्रिकाओं, तीन व्यापक रूप से परिचालित विज्ञान पत्रिकाओं का प्रकाशन करता है और वैल्थ ऑफ इंडिया भारत के कच्ची सामग्री के संसाधन का प्रलेखन करता है।
- निस्केयर की पत्रिकाएं युवा वैज्ञानिकों को अग्रिम पंक्ति के शोध परिणामों से अवगत कराना चाहती हैं। ये पत्रिकाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर की हों, उनके संपादकीय मंडलों में भारत और विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिक और विशेषज्ञ होने के अतिरिक्त, पत्रिकाएं भारतीय और विदेशी वैज्ञानिकों, दोनों के शोध पत्र प्रकाशित करती हैं।
- निस्केयर की स्मारकीय विश्वकोश श्रृंखला वैल्थ ऑफ इंडिया में भारत के सभी कच्ची सामग्री संसाधनों को शामिल किया गया है, चाहे वे पौधे हों, जानवर अथवा खनिज हों। यह शोधार्थियों, उद्यमियों, पादप-आधारित उद्योगपतियों और नीति निर्माताओं के लिए रेडी रेकनर है। भारतकी पौधों की कच्ची सामग्री, जानवरों तथा खनिजों पर एक विश्वकोश श्रंखला, उनकी घटना, वितरण, संरचना, उपयोग तथा व्यापार का विवरण सहित वैल्थ ऑफ इंडिया भारत की जैवविविधता और पारंपरिक ज्ञान स्थापित करने के लिए एक प्रामाणिक स्रोत के रूप में उपयोगी सिद्ध हुई है। इसने हल्दी पर संयुक्त राष्ट्र पेटेन्ट मामले में प्राथमिकता के लिए भारत के दावे का समर्थन करने में प्रमुख भूमिका निभाई है।
- निस्केयर ने यह भी महसूस किया है कि जहां रचनात्मकता ज्ञान की ओर अग्रसर करती है, वहीं इस ज्ञान को वस्तुत: उपयोगी बनाने के लिए इसे आम लोगों तक उस भाषा में संप्रेषित और प्रसारित करने की आवश्यकता है जिसे भली-भांति समझ सकते हैं। निस्केयर अपनी तीन सुपरिचालित लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं जैसे विज्ञान प्रगति (हिंदी, आरंभ, 1952), साइंस रिपोर्टर (अंग्रेजी, आरंभ, 1964) तथा साइंस की दुनिया (उर्दू, आरंभ, 1975) के माध्यम से वैज्ञानिक जानकारी को जनसाधारण तक ऐसी भाषा में प्रसारित कर रहा है जिसमें वे आसानी पूर्वक समझ सकते हैं।
- जबकि, अनेक समय अवधियों में आरंभ हुई सर्वाधिक लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाएं बंद कर दी गई हैं। निस्केयर की विज्ञान पत्रिकाओं का पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से सुचारू रूप से संचालन जारी है। विज्ञान प्रगति (34,000), साइंस रिपोर्टर (36,000) तथा साइंस की दुनिया (8,000)
- ये पत्रिकाएं देश भर के विद्यार्थियों के एक बड़े वर्ग को वैज्ञानिक विकास के बारे में नवीनतम जानकारी प्रदान करती हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी सहायता करती हैं।
- इस संस्थान ने कोशिका तथा जीन (सेल एंड जीन्स) से लेकर कंप्यूटर और कृत्रिम इंटेलीजेंस से लेकर परमाणु और सामग्री और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और सितारों तक के विषयों पर बड़ी संख्या में अच्छी तरह से सचित्र और कम कीमत वाली लोकप्रिय विज्ञान पुस्तकों का प्रकाशन किया है। प्रकाशन के 15 वर्ष बाद भी अत्यधिक मांग है।
- निस्केयर ने देश में विद्यार्थियों तथा शिक्षकों से लेकर वैज्ञानिकों और पेशेवरों तक, उद्योगों तथा अनुसंधान संस्थानों से लेकर किसानों और आम लोगों तक समाज के व्यापक क्षेत्र को शामिल किया है।
- इस संसथान ने लगभग 1 लाख पत्रिकाओं तथा लोकप्रिय विज्ञान पत्रिकाओं के संयुक्त प्रसार के साथ रूढि़वादी अनुमानों के अनुसार लगभग 7 लाख प्रकाशनों का नेतृत्व किया है।
- निस्केयर ने अपने गौरवशाली इतिहास के सात दशकों का जश्न मनाया है!
सीएसआईआर-निस्टैड्स की उत्पत्ति
सीएसआईआर-निस्टैड्स का जन्म अगस्त 1973 में वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के मुख्यालय में विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा विकास अध्ययन केंद्र की स्थापना के साथ हुआ। 30 सितंबर, 1980 को सीएसआईआर के शासी निकाय ने अपनी बैठक में यह स्वीकृति दी कि इस केंद्र को अलग बजट के साथ स्वायत्त केंद्र के रूप में कार्य करना चाहिए। इसका उद्देश्य पूर्ववत की बना रहेगा, किंतु यह स्वायत्त होगा जिसका नेतृत्व किसी राष्ट्रीय प्रयोगशाला के निदेशक स्तर के वैज्ञानिक द्वारा किया जाएगा। इसलिए 30 सितंबर 1980 इस संस्थान का जन्म दिवस है। यद्यपि, इसका वर्तमान नाम 01 अप्रैल 1981 को अस्तित्व में आया है।