नवाचार, उद्यमिता और प्रसार अनुसंधान (आईईडी)

विभाग प्रमुख: डॉ. सुजीत भट्टाचार्य

टीम के सदस्‍य: डॉ. विपन कुमार, डॉ. ताराकांत जाना, डॉ. कस्‍तूरी मंडल, सुश्री प्रमिला मजूमदार, डॉ. शिव नारायण निषाद, डॉ. संध्‍या लक्ष्‍मणन और डॉ. कनिका मलिक

यह वर्टिकल भारत की अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमीय पारिस्‍थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए विज्ञान- प्रौद्योगिकी-नवाचार पारिस्‍थितिकी तंत्र के नीति अध्‍ययन तथा एडवोकेसी और इसके हस्‍तांतरण पर ध्‍यान केंद्रित करेगा। यह अनुसंधान दृष्‍टिकोण वैश्‍विक, राष्‍ट्रीय, क्षेत्रीय एवं सेक्‍टरल फोकस के साथ अंतर- आनुशासनिक/ क्रॉस-अनुशासनिक परिप्रेक्ष्‍य से प्राप्‍त साक्ष्‍य-आधारित होगा। इन अनुसंधान क्षेत्रों का उद्देश्‍य समकालीन प्रासंगिकता के मामलों, सरकार की नई नीतियों तथा इनके निहितार्थों, नवाचार के नए मॉडलों जो मुख्‍य रूप से सूक्ष्‍य एवं लघु उद्यम को शामिल करने वाले क्षेत्रों के भीतर सामाजिक-आर्थिक तथा समावेशी परिप्रेक्ष्‍य लाता है, के विषयों का पता लगाना है। इसके अतिरिक्‍त, नई और उभरती हुई विज्ञान और प्रौद्योगिकियों, इन्‍क्‍यूबेशन इकोसिस्‍टम, स्‍टार्टअप्‍स, प्रौद्योगिकी मूल्‍यांकन तथा अंतर्दृष्‍टि अध्‍ययन, साइंटोमीट्रिक्स और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के अध्‍ययन शामिल हैं। इस अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों में से एक सीएसआईआर की प्रौद्योगिकियों पर ध्‍यान केंद्रित करना होगा।

इस समूह का उद्देश्‍य निस्‍पर के अन्‍य अनुसंधान क्षेत्रों के साथ समस्‍तरीय सम्‍बन्‍ध समेत विभिन्‍न हितधारकोंके साथ मजबूत सम्‍बन्‍ध विकसित करना है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पर नीति निर्धारण प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सम्‍बद्ध भारत तथा विदेश के थिंक टैंक और अन्‍य विभिन्‍न हितधारकों के साथ संयुक्‍त अनुसंधान परियोजनाएं आरंभ करने का भी उद्देश्‍य है। इसका एक उद्देश्‍य इस क्षेत्र में अनुसंधान आरंभ करने के लिए युवा शोधार्थियों को नए अवसर पैदा करना है। इस क्षेत्र में संसाधन तथा कच्‍ची सामग्री विकसित करना एवं विभिन्‍न उप-क्षेत्रों में विशिष्‍ट प्रशिक्षण आरंभ करना है। यह परियोजना अल्‍प-मध्‍य-दीर्घ कालीन लक्ष्‍य के साथ आरंभ की जाएगी। यह समूह वैज्ञानिक, औद्योगिक अनुसंधान, बौद्धिक सम्‍पदा की पत्रिकाओं के साथ इंटरफेस भी करता है जिससे एक मजबूत सम्‍बन्‍ध स्‍थापित होता है।

यह समूह, प्रौद्योगिकी निर्धारण, दूरदर्शिता अध्‍ययन तथा सामाजिक-आर्थिक प्रभाव मूल्‍यांकन के लिए राष्‍ट्रीय स्‍थानीय केंद्र के रूप में उभरने के लिए स्‍वयं ही लक्ष्‍य निर्धारित करता है।