कृषि और सतत ग्रामीण विकास
कृषि और सतत ग्रामीण विकास प्रभाग का उद्देश्य देश के कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के विकास के लिए साक्ष्य आधारित नीतिगत इनपुट प्रदान करने के लिए अनुसंधान करना है। ग्रामीण क्षेत्र, आजीविका के साधन के रूप में मुख्यतः कृषि पर निर्भर करता है, इसकी वृद्धि समीक्षात्मक रूप से गरीबी उन्मूलन, आय वृद्धि, रोजगार और आजीविका सृजन के लिए कृषि के विकास पर निर्भर है। किंतु भारतीय कृषि को अप्रत्याशित मानसून और मौसम जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जो फसल उत्पादन और उपज को प्रभावित करते हैं। प्राकृतिक आपदाएं जैसे बाढ़, सूखा, चक्रवात आदि फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, पशुधन और भूमि भी कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। इन कारकों से कृषि को होने वाले भारी नुकसान के परिणामस्वरूप गरीबी और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास कम होता है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य महत्वपूर्ण कारक कृषि व्यवसाय की स्थिरता है। जैसा कि यह देखा गया है कि अतीत में किए गए उपाय अब इस क्षेत्र में कई अवांछित दुष्प्रभाव पैदा कर रहे हैं, इसलिए, स्थिरता के मुद्दे को बहुत सावधानीपूर्वक संबोधित किया जाना चाहिए। सरकार, राष्ट्रीय मिशनों और राज्य स्तरीय कार्ययोजनाओं द्वारा की गई ग्रामीण विकास की पहलों में एक अन्य पहलू समन्वय है ।
उपरोक्त पृष्ठभूमि में कृषि और सतत ग्रामीण विकास समूह का उद्देश्य निम्नलिखित विषयगत क्षेत्रों में अनुसंधान संचालित करना हैः
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ग्रामीण ज़रूरतों की पहचान और प्रभाव विश्लेषण (RIIA)
- सरकारी योजनाओं में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़ी विषय-वस्तु, संधारणीयता निर्धारण और दिशा
- ग्रामीण विकास योजनाओं का प्रभाव विश्लेषण
- सामाजिक-आर्थिक विकास में सीएसआईआर-प्रौद्योगिकियों के योगदान को प्रदर्शित करने के लिए उनका प्रभाव विश्लेषण
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संधारणीय ग्रामीण नवाचार नीति (एसआरआईपी)
- ग्रामीण नवाचार को बढ़ावा देना (शैक्षिक संस्थानों, समान क्षेत्रों में कार्यरत विभाग, बुनियादी स्तर के स्थानीय ग्रामीण संस्थानों, दूसरे हितधारकों आदि के साथ नेटवर्किंग )
- सीएसआईआर जैसी एजेंसियों की प्रौद्योगिकियों के प्रभावी हस्तांतरणर/क्रियान्वयन के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में आजीविका के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एस एंड टी)
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खाद्य प्रसंस्करण और कृषि-व्यवसाय (एफपीए)
- खाद्य प्रसंस्करण पर आधारित राष्ट्रीय मिशन- आय और आजीविका के सृजन हेतु उभरता हुआ बहुमूल्य क्षेत्र, वैल्यू एडिशन और इम्पोर्ट सब्स्टिट्यूशन के माध्यम से उद्यमों का निर्माण
- एमएसएमई/स्टार्ट-अप्स और आम तौर पर उद्योग के लिए अवसर और चुनौतियाँ, यथा- कोल्ड स्टोरेज; सक्षमता और कौशल विकास, विपणन, जीआई, आइडेंटिफायर (मार्क) आदि।
वर्तमान में संचालित/ शीघ्र शुरू होने वाली योजना
- यूबीए-विभा नेटवर्क का उपयोग करते हुए सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में आजीविका के अवसर पैदा करना: सीएसआईआर और उन्नत भारत अभियान ( यूबीए) और विज्ञान भारती (विभा) के बीच चल रहे सहयोग का उद्देश्य यूबीए-विभा नेटवर्क का उपयोग करते हुए सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर उत्पन्न करना है। इसमें सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित किया जा सकता है और ग्रामीण इलाकों के अलग-अलग हितधारकों की पहचान की जा सकती है जो सीएसआईआर प्रौद्योगिकियों के संभावित प्रयोक्ता हो सकते हैं, जिससे व्यापार उद्योग बनेंगे और ग्रामीण इलाकों में आजीविका के अवसर उत्पन्न होंगे।
- किसान सभा' ऐप का सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन : किसान सभा ऐप को सीएसआईआर और प्राइवेट कंपनी के बीच हुए समझौता ज्ञापन ( MoU) के तहत बनाया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बाजार ढूंढने और उपज को पास के बाजार तक ले जाने के लिए परिवहन ढूंढने में मदद करना है। परियोजना में इस बात का प्रभाव मूल्यांकन किया जाएगा कि यह ऐप किसानों की कितनी मदद कर पाया है। शुरुआत में, किसान सभा के सामाजिक-आर्थिकी प्रभाव का पता लगाने के लिए पैरामीटर्स की पहचान के लिए विशेषज्ञों के साथ एक विचार मंथन सत्र की योजना बनाई गई है।
- भारत में संधारणीय खाद्य आपूर्ति के लिए फसलों की ब्लू वॉटर पर निर्भरता का मूल्यांकन: इस परियोजना में फसलों की पानी पर निर्भरता का मूल्यांकन किया जाएगा। यह राज्य-वार या फसल-वार किया जा सकता है। मूल्यांकन के आधार पर भविष्य में पानी की आवश्यकता का अनुमान लगाया जा सकता है।
- पारंपरिक खाने और स्वास्थ्य प्रणाली को कृषि व्यापार समाधान से जोड़ना: इसमें एक तरफ पारंपरिक खाने और स्वास्थ्य प्रणाली और दूसरी तरफ आधुनिक कृषि व्यापार समाधान के बीच के सम्पर्क का अध्ययन किया जा सकता है, जिससे व्यापार के अवसर उत्पन्न करने और पारंपरिक फसलों को फिर से शुरू करने के तरीके खोजे जा सकते हैं।
- किसान सभा के तहत पहचाने गए स्वयं सहायता समहू के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन : किसान सभा के तहत पहचाने गए स्वयं सहायता समहू की महिला प्रशिक्षुओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा सकता है। ये प्रशिक्षण किसान सभा के तहत पंजीकृत प्रतिभागी से प्राप्त किया जा सकता है और प्रौद्योगिकी की जानकारी संबंधित सीएसआईआर- प्रयोगशाला से ली जा सकती है।