|
NISCAIR ONLINE PERIODICALS REPOSITORY (NOPR) >
NISCAIR PUBLICATIONS >
Research Journals >
Bharatiya Vaigyanik evam Audyogik Anusandhan Patrika (BVAAP) >
BVAAP Vol.17 [2009] >
BVAAP Vol.17(1) [June 2009] >
| Title: | लेजर मापिकी के प्रयोग एवं मापिकीविद के निर्देश |
| Authors: | दत्ता, समिक चटर्जी, सोमनाथ सैनी, विनीत कुमार सेन, रंजन |
| Issue Date: | Jun-2009 |
| Publisher: | CSIR |
| Abstract: | मापिकी सूक्ष्म रूप से मापन विज्ञान
एवं कला है और औद्योगिक उत्पादों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए एक मुख्य
आवश्यक तत्व है। आज के वातावरण में गुणवत्ता के लिए वचनबद्ध मापिकी में मापन की
शुद्धता एवं गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एक अनिवार्य उपकरण के रूप में प्रयोग की जाने
लगी है। भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा मान्यता पाप्त सी एम आर आई की मापिकी
प्रयोगशाला विभिन्न पकार के परीक्षणों और अनुसंशोधन कार्य करने में एक अगणी
प्रयोगशाला है। सी एम आर आई पूर्वी भारत में विमीय मापिकी एवं उससे संबंधित
क्षेत्रों में एक बड़े खिलाड़ी के रूप में कार्यरत है। अभी राष्ट्रीय और अनुसंशोधन
प्रयोगशाला पत्यायन बोर्ड ने अभियांत्रिकी अनुसंशोधन के क्षेत्र में 40 प्राचलो (parameters) को मान्यता पदान की
हुई है। प्रयोगशाला ने लेजर संरेखन (Laser
Alignment)एवं मापन के क्षेत्र में अपनी सुविधाओं को उन्नत किया है और लेजर
द्वारा विमीय मापिकी (Dimensional
metrology) से संबंधित उपकरणों के अनुसंशोधन की दो विधियों का विकास भी किया है।
इस लेख में उसमें से एक विधि 'लेजर
पद्धति के द्वारा माइक़्रो-ऑप्टिक्स
कोलोमीटर का अनुसंशोधन, का वर्णन किया गया है। इसके अतिरिक्त लेजर मापिकी, उसके प्रयोग और सुरक्षा के बारे में संक्षेप में वर्णन किया गया है। |
| Page(s): | 38-41 |
| ISSN: | 0975-2412 (Online); 0771-7706 (Print) |
| Source: | BVAAP Vol.17(1) [June 2009]
|
|