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VP Vol.59 [2010] >
VP Vol.59(12) [December 2010] >
| Title: | अन्तरिक्ष अन्वेषण महत्वाकांक्षी मानव का महान सपना |
| Authors: | शुक्ला, राकेश |
| Issue Date: | Dec-2010 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | बाह्य अंतरिक्ष के विषय में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए खगोलिकी और अंतरिक्ष तकनीकी के प्रयोग को अंतरिक्ष अन्वेषण कहते हैं। अंतरिक्ष का भौतिक अन्वेषण मानवयुक्त अंतरिक्ष उड़ानों और रोबोटिक अंतरिक्षयानों द्वारा किया जाता है। यद्यपि अंतरिक्ष के पिंडों के प्रेक्षण (जिसे खगोलिकी कहते हैं) ने विश्वसनीय रिकॉर्डेड इतिहास का सृजन किया है, लेकिन 20वीं सदी के दौरान विशालकाय द्रव-ईंधन वाले रॉकेट इंजनों का विकास हुआ था जिसने भौतिक रूप से अंतरिक्ष अन्वेषण को एक वास्तविक आयाम दिया। अंतरिक्ष अन्वेषण के सामान्य विचारों में वैज्ञानिक अनुसंधानों को बढ़ावा देना, विभिन्न राष्ट्रों को एक सूत्र में जोड़ना एवं अंतरिक्ष में अंतरिक्ष बस्तीकरण तथा अंतरिक्ष की मानवीय उपयोगों के लिए संभावना का अध्ययन करना है। 4 अक्तूबर 1957 को प्रथम मानव निर्मित पिंड 'स्पुतनिक-1' का प्रमोचन तथा 12 अप्रैल 1961 को अंतरिक्ष में प्रथम मानव यूरी गागारिन का पहुंचना अंतरिक्ष अन्वेषण के प्रारंभिक युग का सूत्रपात कहा जाता है। तत्कालीन सोवियत संघ ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में कई 'प्रथम' रिकॉर्ड दर्ज किए जैसे अंतरिक्ष में प्रथम मानव निर्मित पिंड स्पुतनिक-1, प्रथम जीवित प्राणी यूरी गागारिन, प्रथम जानवर लाइका, एक कुतिया, प्रथम स्वचालित लैंडिंग (किसी अन्य ब्रह्मांडीय पिंड में), प्रथम अंतरिक्ष स्टेशन सैल्यूट-1 तथा अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन 'अल्फा' का प्रथम अवयव 'ज़रया' एवं प्रथम स्पेस वाक है। |
| Page(s): | 11-15 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.59(12) [December 2010]
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