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VP Vol.60 [2011] >
VP Vol.60(03) [March 2011] >
| Title: | नौजवानो, रासायनिक प्रयोगशाला में खतरों को पहचानो! |
| Authors: | नंदन, देवकी |
| Issue Date: | Mar-2011 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | जिस तरह अंग्रेजी भाषा में डी ओ मिला कर 'डू' बनता है
मगर जी ओ मिलाकर 'गो' बन जाता है, कुछ वैसा ही किस्सा हमारी कैमिस्ट्री यानी
रसायनशास्त्र का भी है। इसमें जब ज्वलनशील हाइड्रोजन (H2) ज्वाला भड़काऊ ऑक्सीजन गैस
(O2) से क्रिया करती है तो हमें ज्वाला बुझाने वाला जल (H2O) प्राप्त होता है। कुछ विद्यार्थी
कुछ-कुछ इन्हीं कारणों से कैमिस्ट्री को शायद कुछ नापसंद भी करते हों परन्तु
उन्हें पता है कि यह बढ़िया अंक भी दिलवा सकती है। उन्हें हम यह भी बता दें कि
व्यवहार के अनोखेपन के बावजूद अंग्रेजी की तरह कैमिस्ट्री भी सर्वव्यापक और दुनिया
पर छा जाने वाला विषय है। जी हां, क्योंकि 40 लाख रसायनों की बहुमुखी शक्ति से सजी
यही कैमिस्ट्री आज हमारे दैनिक जीवन में न
केवल सबसे उपयोगी है बल्कि आर्थिक नज़रिये से भी
यह 21वीं सदी की टॉप विज्ञान-शाखा है। इस वक्त विश्व की हजारों-हजारों
रासायनिक प्रयोगशालाओं में चल रहे उन्नत प्रयोग भी यही संकेत दे रहे हैं तो
आश्चर्य क्या कि राष्ट्रसंघ ने वर्ष 2011 की रासायनिकी का वर्ष घोषित कर दिया है,
है न? और हां, एक सर्वेक्षण के मुताबिक विश्व के वैज्ञानिकों ने जल को 21वीं सदी
का सबसे अहम पदार्थ और अणु घोषित भी कर दिया है। |
| Page(s): | 17-21 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.60(03) [March 2011]
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