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VP Vol.60 [2011] >
VP Vol.60(03) [March 2011] >
| Title: | अद्वितीय थीं मैडम क्यूरी कांटों पर चलने की थी मजबूरी |
| Authors: | चतुर्वेदी, श्री विष्णु प्रसाद |
| Issue Date: | Mar-2011 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | वर्ष 2011 को अन्तर्राष्ट्रीय रसायन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। मैडम क्यूरी को रसायन का नोबल पुरस्कार मिले 100 वर्ष पूरे हो गए हैं। विज्ञान की दो अलग-अलग विधाओं में नोबल पाने का कीर्तिमान बनाने वाली मैडम क्यूरी को पहला नोबल पुरस्कार भौतिकशास्त्र में 1903 में उनके पति पियरे क्यूरी तथा गुरू हेनरी बेक्वेरेल के साझे में मिला था। आज हम मेडम क्यूरी को दो बार नोबल पुरस्कार मिलने पर उनके भाग्य को सराह रहे हैं। उनके जीवन पर दृष्टि डालें तो पता चलता है कि दोहरे नोबल तक पहुंचने के लिए उन्हें कठिनाइयों के कितने हिमालय पार करने पड़े थे। मैडम क्यूरी की राहें ऐसे नुकीले कांटों से भरी थीं जिनसे तन के साथ मन भी छलनी हो जाता था। अकस्मात् हुई दूसरे नोबल पुरस्कार की घोषणा के समय भी मैडम क्यूरी के मन की स्थिति अच्छी नहीं थी। |
| Page(s): | 13 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.60(03) [March 2011]
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