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VP Vol.59 [2010] >
VP Vol.59(11) [November 2010] >
| Title: | खूबसूरत रंगीन लेंस |
| Authors: | पाण्डेय, विजन कुमार |
| Issue Date: | Nov-2010 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | एक आम आदमी की समझ में कांच का अर्थ होता है कोई पारदर्शक, ऊष्मीय तथा विद्युतीय तौर पर कुचालक ठोस वस्तु जो गिरने पर आसानी से टूट कर बिखरने वाली हो। आज हम सूचना प्रौद्योगिकी के युग में रह रहे हैं और इस युग की विशेषता सूचनाओं के अति तीव्र गति से संचरण में है। आज हम न केवल पृथ्वी पर किसी एक देश/प्रदेश से दूसरी जगह संपर्क कर सकते हैं बल्कि अंतरिक्ष से भी पृथ्वी पर सीधा संचार कर सकते हैं। इस संचार एवं बातचीत के दौरान हम एक दूसरे को देख भी सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि यह कैसे संभव हुआ? इस क्रांति के लिए जिम्मेदार है प्रकाश संचरण की खोज। आखिर यह प्रकाश संचरण है क्या? वस्तुतः प्रकाश संचरण में सूचनाओं को पारंपरिक विद्युत संकेतों के बदले प्रकाशीय संकेतों के माध्यम से भेजा जाता है। इन संकेतों को भेजने का माध्यम धात्वीय तार न होकर प्रकाशीय तंतु होते हैं। आप जानकर आश्चर्य करेंगे कि ये प्रकाशीय तंतु और कुछ नहीं बल्कि पारंपरिक रूप से खिड़कियों, सजावट के सामान व बर्तनों में प्रयोग में आने वाले कांच की तरह के विशेष संगठन वाले कांचीय पदार्थ ही होते हैं। धात्वीय तारों के मुकाबले इन प्रकाशीय तंतुओं या फाइबरों में से कई गुना अधिक सूचनाएं, अत्यंत तीव्र गति से तथा न्यूनतम ह्रास (0.28 डी बी/किमी.) के साथ भेजी जा सकती हैं। इस कांच ने न केवल सूचना प्रसारण में योगदान दिया है बल्कि आज गगनचुंबी इमारतों के निर्माण में उन्हें मनमोहक छवि प्रदान करने में भी क्रांति ला दी है। |
| Page(s): | 57-60 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.59(11) [November 2010]
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