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VP Vol.59 [2010] >
VP Vol.59(10) [October 2010] >
| Title: | संकट में वनराज |
| Authors: | भट्ट, संदीप |
| Issue Date: | Oct-2010 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | भारत के जंगलों का राजा 'बाघ' अब आतंक के साये में जीने को मजबूर है। एक समय वनों में स्वतंत्र विचरण करने वाले वनराज आज संकट में हैं। अंधाधुंध वनों की कटाई, लगातार बढ़ रहे अवैध शिकार और छोटे होते जा रहे जंगलों ने बाघों को खतरे में डाल दिया है। आज राजा की सारी प्रजाति के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। वर्ल्ड वाइड फंड और कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों समेत तमाम दुनिया के वन्यजीव प्रेमियों ने इस पर खासी चिंता जाहिर की है। पर्यावरणविद् मानते हैं कि अगर बाघों का सफाया इसी तरह से होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब बाघों के किस्से सिर्फ किताबों में ही मिल सकेंगे। |
| Page(s): | 47-48 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.59(10) [October 2010]
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