|
NISCAIR ONLINE PERIODICALS REPOSITORY (NOPR) >
NISCAIR PUBLICATIONS >
Popular Science Magazines >
विज्ञान प्रगति (Vigyan Pragati) >
VP Vol.60 [2011] >
VP Vol.60(02) [February 2011] >
| Title: | रिमोट सेन्सिंग तथा जी.आई.एस. की उपयोगिता |
| Authors: | उनियाल, अनिरुद्ध |
| Issue Date: | Feb-2011 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | विगत दशकों में उपग्रह आधारित सुदूर संवेदन (सेटेलाइट रिमोट सेन्सिंग) तथा कम्प्यूटर आधारित भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी.आई.एस.) तकनीकों के विकास से प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन तथा आपदा प्रबन्धन की अवधारणाओं में क्रान्तिकारी परिवर्तन आया है। किसी वस्तु के भौतिक सम्पर्क में आये बगैर उसके बारे में जानकारी प्राप्त करना ही सुदूर संवेदन (रिमोट सेन्सिंग) है। भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन के विशिष्ट प्रयासों से भारत स्वनिर्मित प्रक्षेपण वाहनों द्वारा अनेक स्वदेशी एवं विदेशी सुदूर संवेदन उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी राष्ट्रों की कतार में सम्मिलित है। वर्तमान में रिर्सोससेट, कार्टोसेट-1, कार्टोसेट-2 तथा कार्टोसेट-2वी आदि उच्च विभेदन संवेदकों (हाई रिजोल्यूशन सेंसरों) से युक्त भारत के अनेक सुदूर संवेदन उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हैं। इन उपग्रहों से प्राप्त देश के विभिन्न हिस्सों के स्थलीय एवं सतहीय जल क्षेत्रों तथा तटीय क्षेत्रों के उपग्रहीय चित्रों को आवश्यकतानुसार प्रसंस्करित
(प्रोसेस) कर विभिन्न प्रकार के मानचित्रण हेतु उपयोग किया जाता है। |
| Page(s): | 33-37 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.60(02) [February 2011]
|
|