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VP Vol.60 [2011] >
VP Vol.60(02) [February 2011] >
| Title: | केन्द्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, पिलानी |
| Authors: | मिश्र, एस. एन. |
| Issue Date: | Feb-2011 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | हमारा देश प्राचीन काल से ही अनेक क्षेत्रों में विश्व का पथ प्रदर्शक रहा है। ज्ञान-विज्ञान, चिकित्सा एवं आयुर्विज्ञान, ज्योतिष विद्या, खगोलशास्त्र, गणित तथा आध्यात्मिक क्षेत्र में भारत ने अग्रणी भूमिका निभाई है। चरक, सुश्रुत, कणाद, कपिल, अगस्त्य आदि ऋषि-मुनियों को इन विषयों में विशेषज्ञ माना जाता था। इसका पक्का प्रमाण हमारे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। वेदों को संसार का सबसे प्राचीन ग्रंथ माना गया है, जिनमें विज्ञान भरा-पड़ा है। रामायण एवं महाभारत काल में हमारे यहां विज्ञान अपने चरम उत्कर्ष पर था। परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत नियम है। धीरे-धीरे हमारे ज्ञान-विज्ञान की प्रगति का ह्रास हुआ और हम पिछड़ गये। सदियों की दासता ने हमारे भीतर पराजित मानसिकता को पनपा दिया और समय के साथ हम अपने चरमोत्कर्ष बिंदु से नीचे की ओर चलते गए। 'फूट डालो और राज करो' की नीति पर चलने वाले अंग्रेजी शासन ने हमारे देश की बौद्धिक व खनिज सम्पदा का भरपूर दोहन किया। यहां तक कि हमारी संस्कृति को भी पथभ्रष्ट कर दिया। |
| Page(s): | 17 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.60(02) [February 2011]
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