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VP Vol.60 [2011] >
VP Vol.60(01) [January 2011] >
| Title: | अद्भुत एवं बहुपयोगी जैवसम्पदा : पर्णांग |
| Authors: | लाल, अलका कुमारी, बृज सिंह, आर.डी. |
| Issue Date: | Jan-2011 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | पृथ्वी विविध एवं अद्भुत जैवसम्पदा का एक प्राकृतिक स्रोत है। इस असीम विविधता के अन्तर्गत नाना प्रकार की वनस्पतियों एवं जन्तुओं का समावेश है। चाहे पादप हो या जन्तु समुदाय प्रत्येक वर्ग की अपनी एक विशष्टि पहचान है। इन्हीं विशिष्टताओं के आधार पर सम्पूर्ण पादप जगत को अपुष्पीय तथा पुष्पीय पादप समुदायों में विभाजित किया गया है। जीवन उद्भव के दौरान धरातल पर जब जीवों का नामोनिशान नहीं था, और पृथ्वी केवल धूलकणों, विभिन्न प्रकार की गैसों तथा जल से निमग्न थी, उस समय सर्वप्रथम हरे तन्तुमय शैवाल का परिवर्धन हुआ तथा धीरे-धीरे क्रमिक विकास द्वारा पेड़-पौधों की उत्पत्ति हुई। इस क्रमिक विकास के दौरान अपुष्पीय समुदाय में संवहनीय तंत्र का विकास हुआ और प्रथम संवहनीय तंत्रयुक्त अपुष्पीय समुदाय को पर्णांग अर्थात् टेरिडोफाइट्स के नाम से जाना गया। इस पादप समुदाय का उल्लेख आज से करीब चालीस करोड़ वर्ष पहले जीवाश्म के रूप में मिलता है। पुष्पविहीन वर्ग में पर्णांग सर्वाधिक विकसित समुदाय है। उद्भव के करोड़ों वर्ष बाद भी यह स्वतंत्र एक युग्मित युग्मकोद्भिद (गैमिटोफाइट्स) के रूप में अस्तित्व में है जो बाद में द्विगुणित बीजाणुभिद् (स्पोरोफाइट्स) बनाते हैं। युग्मकोद्भिद तथा बीजाणुभिद् एक दूसरे से काफी भिन्न हैं। इस प्रकार का विशिष्ट जीवन चक्र पर्णांगों की एक मुख्य विशेषता है। |
| Page(s): | 43-46 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.60(01) [January 2011]
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