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Title: वृक्षों पर खेती
Authors: कोहली, दीपक
Issue Date: Jan-2011
Publisher: निस्केयर- सी एस आई आर, भारत
Abstract: वृक्ष पर खेती – है न आश्चर्यजनक तथ्य, मगर यह सत्य है कि पेड़ों पर खेती आदिकाल से चली आ रही है और वह खेती है लाख की खेती, जो वृक्षों पर की जाती है। लाख एक प्राकृतिक राल है बाकी सब राल कृत्रिम हैं। इसी कारण इसे 'प्रकृति का वरदान' कहते हैं। लाख के कीट अत्यन्त सूक्ष्म होते हैं तथा अपने शरीर से लाख उत्पन्न करके हमें आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं। वैज्ञानिक भाषा में लाख को लेसिफर लाखा कहा जाता है। 'लाख' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के 'लक्ष' शब्द से हुई है, संभवतः इसका कारण मादा कोष से अनगिनत शिशु क्ड़ों का निकलना है। लगभग 34 हजार लाख के कीड़े एक किग्रा. रंगीन लाख तथा 14 हजार 4 सौ लाख के कीड़े एक किग्रा. कुसुमी लाख पैदा करते हैं। अथर्ववेद में भी लाख की चर्चा है। महाभारत काल में लाक्षागृह का वर्णन है जो पाण्डवों को मारने के लिए बनाया गया था, क्योंकि लाख की जल्दी जलने की प्रवृत्ति होती है। मुगल सम्राट अकबर के 'आइने-अकबरी' में भी लाख के गुणों का उल्लेख मिलता है।
Description: 36
URI: http://hdl.handle.net/123456789/11130
ISSN: 0042-6075
Appears in Collections:VP Vol.60(01) [January 2011]

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