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Title: विज्ञान गल्प - अन्तिम रचना
Authors: अलवेरा, बुशरा
Issue Date: Jan-2011
Publisher: निस्केयर- सी एस आई आर, भारत
Abstract: उसकी ठहाके भरी हँसी से हैवानियत बरस रही थी। उसने मुझे घूरा और बोला – "क्या तुम नहीं जानना चाहते कि तुम्हारी पृथ्वी का यह हाल कैसे हुआ?" मेरे भीतर उत्तर देने मात्र भी शक्ति शेष नहीं थी। मैंने अपनी गर्दन हिला दी। वह बोला – "तुम्हें पता है कि तुम मनुष्यों की सबसे बड़ी कमी क्या थी? मैं तुम्हें बताता हूँ! तुम मनुष्यों ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का मूल्य नहीं समझा। अपनी माँ जैसी निर्मल पृथ्वी को बचाने के बजाए, आपस में ही लड़ते रहे।"
Page(s): 23-24
URI: http://hdl.handle.net/123456789/11126
ISSN: 0042-6075
Appears in Collections:VP Vol.60(01) [January 2011]

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