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VP Vol.60 [2011] >
VP Vol.60(01) [January 2011] >
| Title: | संभलने का पल है जल है तो कल है ! |
| Authors: | कुमार, भीष्म मेहता, रमा |
| Issue Date: | Jan-2011 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (राजसं) जल संसाधन मंत्रालय के अधीन भारत सरकार की एक सोसाइटी है जिसकी स्थापना सन् 1978 में एक स्वायत्तशासी संस्थान के रूप में की गई थी। यह संस्थान देश में जलविज्ञान तथा जल संसाधन के क्षेत्र में एक श्रेष्ठ अनुसंधान संस्था के रूप में कार्य कर रहा है। वर्तमान में यह संस्थान आधारभूत, अनुप्रयुक्त तथा सामरिक अनुसंधान कार्यों का संचालन कर रहा है तथा अपने उत्कृष्ट एवं सराहनीय शोध तथा विकास कार्यों के परिणामस्वरूप इस संस्थान ने जल, जलविज्ञान तथा जल संसाधन के क्षेत्र में न केवल राष्ट्रीय स्तर पर अपितु अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिष्ठा तथा ख्याति प्राप्त की है । यह संस्थान उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार जनपद के अंतर्गत, इस राज्य की शिक्षा नगरी कहे जाने वाले एक छोटे से शहर रुड़की में स्थित है। दिसम्बर, 1978 को अस्तित्व में आए इस संस्थान ने 16 दिसम्बर, 2010 को अपना 32 वर्षों का गरिमामय सेवाकाल पूरा कर लिया। इस आमुख कथा के माध्यम से इस संस्थान के 32 वर्षों की सेवा यात्रा का संक्षिप्त ब्यौरा प्रस्तुत किया जा रहा है। साथ ही प्रस्तुत है इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उद्देश्य, संगठनात्मक संरचना, प्रमुख उपलब्धियां तथा आधारभूत सुविधाओं आदि की एक झलक। |
| Page(s): | 5 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| Source: | VP Vol.60(01) [January 2011]
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