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Title: नई सुबह
Authors: मिश्र, अभिषेक
Issue Date: Sep-2010
Publisher: निस्केयर- सी एस आई आर, भारत
Abstract: नया वायरस मानो सारी मानवता को ही लील लेने पर आमादा था। यह कहाँ जन्मा, इसे लेकर तमाम अटकलें लगाई जा रही थीं, मगर चिंता की बात इसके फैलाने के तरीके को लेकर थी। यह वायरस सबसे पहले घरेलू पशुओं को प्रभावित कर रहा था, और जब तक कि इनमें इसके लक्षण पहचाने जा पाते यह मनुष्यों तक अपनी पैठ बनाने में सफल हुए जा रहा था। जाहिर है, बच्चे ही इस वायरस के सबसे आसान शिकार बनते थे। बच्चों की जीवाणु प्रतिरोधक क्षमता कम होना भी इस वायरस का बच्चों में ज्यादा तेजी से सक़्रिय होने की एक बड़ी वजह थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वायरस के मनुष्य से मनुष्य में फैलाने की संभावना की भी चेतावनी जारी कर दी थी। पालतू पशुओं से संक़्रमित होने की वजह से यह 'पेट्स अफेक्टिंग वायरस के नाम से चर्चित हो गया था।
डॉ. स्वराज दीक्षित, जो एक वरिष्ठ जीवरसायन विज्ञानी थे, इस घटनाक़्रम पर गहराई से नजर रखे हुए थे। उन्हें इस बात की संतुष्टि थी कि भारत अब तक इस वायरस के प्रभाव से मुक्त था। विदेश यात्राओं से लौटने वाले एक-दो यात्रियों पर इस वायरस से प्रभावित होने की संभावना नजर आने पर उनकी प्रारंभिक जांच करवाए जाने के परिणाम भी नकारात्मक निकल रहे थे। यद्यपि ये संकेत राहत का एहसास तो दे रहे थे मगर वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर निश्चिन्त भी नहीं रहा जा सकता था।
Description: 39-40
URI: http://hdl.handle.net/123456789/10427
ISSN: 0042-6075
Appears in Collections:VP Vol.59(09) [September 2010]

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