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VP Vol.59 [2010] >
VP Vol.59(09) [September 2010] >
| Title: | हिमालय का सोना सीबकथोर्न |
| Authors: | द्विवेदी, एस के |
| Issue Date: | Sep-2010 |
| Publisher: | निस्केयर- सी एस आई आर, भारत |
| Abstract: | प्राचीन काल से ही हमारा देश जड़ी-बूटियों का भण्डार रहा है। हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में बहुमूल्य औषधियों की उपलब्धता और उनके चमत्कारिक गुणों का प्रमाण हमारे प्रचीन ग्रन्थों में भी मिलता है। आज भी इस क्षेत्र में बहुमूल्य पौधों की अनेक प्रजातियां पायी जाती हैं जो पीड़ानाशक के रूप में प्रयोग में लायी जाती हैं। हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों, खासकर शुष्क एवं अति शीतोष्ण भाग में विशेष प्रकार की कंटीली झाड़ी सदियों से उगती आयी है जिसे हम 'सीबकथोर्न' के नाम से जानते हैं। हाल में हुए अनुसंधानों के परिणामों से इस कटीली झाड़ी को हिमालय का सोना अथवा जादुई झाड़ी जैसे विशेषणों से ख्याति मिली है, जिसने अपने पोषण एवं चमत्कारिक औषधीय गुणों के कारण प्रसिद्धि पायी है। बेहद बंजर एवं अनुपजाऊ क्षेत्र में आसानी से उग सकने, मृदा अपरदन कम करने, उर्वरा शक्ति बढ़ाने एवं पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने जैसे गुणों के कारण इसे अत्यन्त उपयोगी माना जा रहा है। हमारा देश दुनिया के उन गिने चुने देशों में से एक है जहां इस जादुई पौधे के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। प्रस्तुत आलेख में हम सीबकथोर्न के गुणों, शोध परिणामों एवं इसके विकास की संक्षिप्त कहानी प्रस्तुत कर रहे हैं। |
| Page(s): | 17-21 |
| CC License: | सी सी एट्रीब्यूशन- नॉनकर्मेशियल- नो-डेरिवेटिव वर्क्स 2.5 इण्डिया |
| ISSN: | 0042-6075 |
| Source: | VP Vol.59(09) [September 2010]
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