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    <title>NISCAIR Online Periodicals Repository Collection: BVAAP Vol.17(1) [June 2009]</title>
    <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/7924</link>
    <description>विशेषांक: मापिकी एंव गुणवत्ता  प्रबंधऩ</description>
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      <title>The Collection's search engine</title>
      <description>Search the Channel</description>
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      <link>http://nopr.niscair.res.in/simple-search</link>
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    <item>
      <title>इलेक्ट्रॉन अनुचुंबकीय अनुनाद स्पैक्ट्रोमिकी द्वारा मापित बहुलकों में आवेश वाहकों की सांद्रता का विस्तारित अनिश्चतता मूल्यांकन</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/7984</link>
      <description>Title: इलेक्ट्रॉन अनुचुंबकीय अनुनाद स्पैक्ट्रोमिकी द्वारा मापित बहुलकों में आवेश वाहकों की सांद्रता का विस्तारित अनिश्चतता मूल्यांकन
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: अरोड़ा, मंजु; गुप्ता, एस के
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: इलेक्ट्रॉन अनुचुंबकीय अनुनाद (ई पी आर) स्पैक्ट्रोमिकी किसी भी पदार्थ में विद्यमान अनुचुंबकीय केंदा और स्वतंत्र मूलकों के अभिलक्षणन तथा मात्रात्मक अनुमान लगाने के&#xD;
लिए एक अतिविशिष्ट और संवेदी पविधि है। आई एस ओ/आई ई सी 17025 मानक&#xD;
निर्देशक रेखाओं के अनुसार किसी भी पाचल को मात्रात्मक मान देने के लिए, इसके साथ अनिश्चितता मान सदैव होना चाहिए। इन&#xD;
अययनों के लिए, वैरियन मेक एक्स-बैंड ई-लाइन&#xD;
सेंचुरी सिरीज ई-112 ई पी आर&#xD;
स्पैक्ट्रोमिकी का प्रयोग परिवेशी ताप पर HCL&#xD;
मादित&#xD;
पॉलीएनिलीन नमूनों और PTSA के विभिन्न&#xD;
सांदताओं वाले वर्णक़्रमों को रिकार्ड करने के लिए किया गया। ई पी आर वर्णक़्रम मापन&#xD;
के दौरान अवेष्टित सभी स्रोतों  की पहचान&#xD;
की गई और उन्हें अनुकूलतम बनाया गया। डी पी पी एच का प्रयोग मानक संदर्भ पदार्थ और&#xD;
चिह्नक और रूप में किया गया है। इस कार्य में,&#xD;
इन&#xD;
मादित पॉलीएनिलीन नमूनों में आवेश वाहकों की पचकण सांदता में विस्तारित अनिश्चितता&#xD;
अनुमानित की गई। मानक संदर्भ पदार्थ,&#xD;
यंत्र&#xD;
के चुंबकीय क्षेत्र, भार तुलन अंशांकन, विश्लेषक के पभाव और यादृच्छिक पभावों आदि के सापेक्ष&#xD;
नमूना निर्मित, भंडारण दशाओं, यंत्र स्थिरता, पर्यावरणीय दशाओं जैसे ताप,&#xD;
आदर्ता, विद्युत आपूर्ति और अंशांकन पभावों का वर्णन किया&#xD;
गया तथा उन्हीं पर्यावरणीय दशाओं को बनाए रखते हुए और रिकार्ड किए हुए आंकड़ों की&#xD;
पुनरावृत्ति क्षमता के मायम से उनको नियंत्रित किया गया। केंदीय चुंबकीय क्षेत्र और&#xD;
आंकिक भार तुलन संबंधी अनिश्चितता विनिर्माता के अंशांकन पमाण पत्र/विवरण अनुशंसाओं से पाप्त की गई। वक़्र अवक्षेत्र (एरिया अंडर कर्व), यंत्र, मानक संदर्भ पदार्थ&#xD;
और भार तुलन संबंधी अनिश्चितताओं को टाइप-ए और टाइप-बी अनिश्चितताओं के तहत श्रेणीबद्ध किया गया।&#xD;
विवरण (साहित्य) में उपलब्ध मानक पक़्रिया का प्रयोग करते हुए इन&#xD;
पृथक अवयवों के लिए अनिश्चितता तथा विस्तारित अनिश्चितता का परिकलन किया गया और&#xD;
व्याप्त घटक k=2 के साथ 95% की विश्वास्यता स्तर पर रिपोर्ट किया&#xD;
गया। इसलिए विस्तारित अनिश्चितता मानों के साथ इन मापित पॉलीएनिलीन के विभिन्न&#xD;
नमूनों की पति गाम पचक़्रण सांदता उनके सत्य मानों के अति निकट थी। इन अययनों ने ई&#xD;
पी आर स्पैक्ट्रोमिकी द्वारा अनुचुंबकीय केंदों की पचकण सांदता में विस्तारित&#xD;
अनिश्चितता के मूल्यांकन की विधि को उजागर किया। यह मापन क्षमता के स्थापन  और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मापन आंकड़ों की&#xD;
स्वीकार्यता को पदर्शित करता है ।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 56-59</description>
      <pubDate>Fri, 29 May 2009 22:58:59 GMT</pubDate>
    </item>
    <item>
      <title>विलय जैल से पाप्त जिंक ऑक्साइड की तनु फिल्म का अभिलक्षणन और संवेदकों के अनुप्रयोगों में उनकी युक्तियों का महत्व</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/7983</link>
      <description>Title: विलय जैल से पाप्त जिंक ऑक्साइड की तनु फिल्म का अभिलक्षणन और संवेदकों के अनुप्रयोगों में उनकी युक्तियों का महत्व
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: बहादुर, हरीश; श्रीवास्तव, ए के; रश्मि; चन्दर, हरीश; बासु, ए; तिवारी, एम के; शर्मा, आर के; सूद, के एन; रामकिशोर; सामन्ता, एस बी; चंदा, सुधीर
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: जिंक ऑक्साइड के 25 %&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;विलय का प्रयोग&#xD;
करने पर इसके षटकोणीय आकृति के नैनोकण इच्छित C-अक्ष की दिशा में&#xD;
बनते हैं। चयनित क्षेत्र इलेक्ट्रॉन विवर्तन पैटर्नों ने दिखाया है कि&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;12.5&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;विलय के&#xD;
साथ बनी फिल्में 100&#xD;
और&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;002&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;तलों का पदर्शन करती हैं जबकि &lt;i style=""&gt;25 &lt;/i&gt;विलय&#xD;
फिल्मों ने 100, 002, 102&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;और 201&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;तलों को&#xD;
उजागर किया है। पकाशसंदीप्ति स्पेक्ट्रा (&lt;i style=""&gt;चित्र &lt;/i&gt;6)&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;ने (ZnO)&#xD;
क़्रिस्टलाणुओं के क्वांटम परिरोधन के अनुरूप षटकोर&#xD;
उत्सर्जन को दिखाया है। 15nm&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;की उच्च&#xD;
ऊर्जा &lt;i style=""&gt;(&lt;/i&gt;ब्लू शिफ्ट&lt;i style=""&gt;) &lt;/i&gt;की ओर&#xD;
षटकोर उत्सर्जन में परिवर्तन 12.5%&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;विलय का प्रयोग&#xD;
करके निर्मित की गई फिल्म के सूक्ष्मतर (ZnO)&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;कणों के&#xD;
लिए देखा गया है। एक संरचनात्मक गुण सहसंबंध पूरा किया गया है ताकि विविध&#xD;
वृद्धियों को पभावित करने वाली विलय सांदता की क़्रियाविधि को तथा (ZnO)&lt;i style=""&gt; &lt;/i&gt;नैनोसंरचनाओं  के फलकीकरण और बाद&#xD;
में उनके संदीप्ति पर पभाव को समझा जा सके। इन परिणामों का अनुप्रयोग&#xD;
नैनोइलेक्ट्रॉनिक दाब वैद्युत संवेदकों में होगा।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 79-81</description>
      <pubDate>Fri, 29 May 2009 22:58:59 GMT</pubDate>
    </item>
    <item>
      <title>सूक्ष्म न्यूटन बलों के साथ अनुरेखणता को जोड़ने के लिए बल प्राथमिक मानक</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/7982</link>
      <description>Title: सूक्ष्म न्यूटन बलों के साथ अनुरेखणता को जोड़ने के लिए बल प्राथमिक मानक
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: जैन, कमलेश के; टाइटस, एस एस के; कुमार, हरीश
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: &lt;b style=""&gt;&lt;/b&gt;±&lt;b style=""&gt;40 ppm (k=2) &lt;/b&gt;की अनिश्चितता वाली &lt;b style=""&gt;2-20 N &lt;/b&gt;के परास में बलों का अनुभव करने के लिए नर्ई&#xD;
डिजाइन और विकसित की गयी बल मशीन के मापिकीय अभिलक्षणन के पारंभिक परिणामों का&#xD;
उल्लेख इस शोध पत्र में किया गया है। मशीन का अभिलक्षणन &lt;b style=""&gt;10 &lt;/b&gt;और &lt;b style=""&gt;20 N &lt;/b&gt;की क्षमता के दो स्थानांतरण बल मानकों का&#xD;
प्रायोग करके किया गया है जिसकी अपोढ़ &lt;b style=""&gt;(&lt;/b&gt;ड्रिफ्ट&lt;b style=""&gt;) &lt;/b&gt;की अनिश्चितता तथा पुनरावृत्ति क़्रमशः ±&lt;b style=""&gt; 0.20% &lt;/b&gt;और&lt;b style=""&gt; &lt;/b&gt;±&lt;b style=""&gt;0.005% &lt;/b&gt;से बेहतर है।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 76-78</description>
      <pubDate>Fri, 29 May 2009 22:58:59 GMT</pubDate>
    </item>
    <item>
      <title>कला अपूर्वता (phase singularity) - प्रकाश विज्ञान का नया आयाम</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/7981</link>
      <description>Title: कला अपूर्वता (phase singularity) - प्रकाश विज्ञान का नया आयाम
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: यादव, भरत कुमार; मेहरोत्रा, रंजना; काण्डपाल, हेम चन्द
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: प्रकाश विज्ञान की अपनी एक अनोखी&#xD;
दुनिया है। कभी सात रंग मिलकर सफेद हो जाते हैं तो कभी काले रंग से सतरंगी रंग पकट हो जाते हैं। काले रंग में छुपे बहुरंगों की आंखमिचोलियों  का अययन ही कला अपूर्वता के नए अनोखे संसार से&#xD;
अवगत कराता है। इस लेख में कला अपूर्वता का मापिकी में प्रयोग व उसके उपयोग की नई&#xD;
संभावनाओं के बारे में विस्तृत वर्णन किया गया है।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 73-75</description>
      <pubDate>Fri, 29 May 2009 22:58:59 GMT</pubDate>
    </item>
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