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    <title>NISCAIR Online Periodicals Repository Collection: VP Vol.60(03) [March 2011]</title>
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      <title>The Collection's search engine</title>
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      <title>जिन्दगी के रंग कई रे</title>
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      <description>Title: जिन्दगी के रंग कई रे
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: शर्मा, कुलदीप
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: हमारे जीवन के केन्द्र में समाया हुआ है रसायन विज्ञान, यानी कैमिस्ट्री। यही कारण है कि यह केन्द्रीय विज्ञान भी कहलाता है। पहली बार जब मानव ने पत्थर पर पत्थर मार कर जब आग पैदा की तो ईंधन की शुरूआत हो गई और आभास हुआ रसायन विज्ञान की महत्ता का। खानपान में, दवा उपचार में, आकर्षक बने रहने के लिए बाल काले करने में, गरज यह कि जीवन के हर कदम पर रसायन का मान है। जन-जन तक रसायन विज्ञान की उपलब्धियों को पहुंचाना, पर्यावरण स्वच्छ रखने की समझ देना, सेहत बिगड़ने से रोकना, आर्थिक विकास में मददगार होना एक बड़ी चुनौती है। इसी सोच को साकार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की 63वीं आम सभा वर्ष 2008 के दिसम्बर माह में हुई। रसायन विज्ञान की महत्ता को आधार बनाते हुए वर्ष 2011 को अन्तर्राष्ट्रीय रसायन विज्ञान वर्ष घोषित किया गया। इसकी थीम 'रसायन विज्ञान - हमारा जीवन हमारा भविष्य' रखी गई है। अब यह कोई त्यौहार मनाने वाली बात तो है नहीं, अतः इसके लिए बड़े पैमाने पर ठोस कदम उठाने होंगे। इसके लिए कुछ लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं जिन्हें पूरे वर्ष पूर्ण करने के प्रयास किये जाएंगे।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 53-60</description>
      <pubDate>Sat, 26 Feb 2011 22:58:59 GMT</pubDate>
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      <title>फैरोह का सर्प</title>
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      <description>Title: फैरोह का सर्प
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: खान, मोहम्मद अज़हर
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 50</description>
      <pubDate>Sat, 26 Feb 2011 22:58:59 GMT</pubDate>
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      <title>हम सुझाएं आप बनाएं :  दोहरा डिज़िटल तापमापी</title>
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      <description>Title: हम सुझाएं आप बनाएं :  दोहरा डिज़िटल तापमापी
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: चौरे, अभिनव
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 49</description>
      <pubDate>Sat, 26 Feb 2011 22:58:59 GMT</pubDate>
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      <title>विज्ञान ने लौटाया खनिकों को जीवन</title>
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      <description>Title: विज्ञान ने लौटाया खनिकों को जीवन
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: वेंकटेश्वरण, टी.वी.; गुप्ता, नवनीत कुमार
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: विज्ञान वरदान है या अभिशाप इस बात पर हमेशा से बहस होती रही है। असल में विज्ञान स्वयं वरदान या अभिशाप नहीं है, यह तो उसे उपयोग करने वालों पर ही निर्भर करता है कि वे उसका उपयोग किस प्रकार करते हैं। वैसे देखा जाए तो विज्ञान वरदान ही है क्योंकि मूल मानवीय स्वभाव (या कहें मानव धर्म) तो केवल सृजनात्मकता को प्राथमिकता देता है। इस प्रकार सृजनात्मक का आधार बनकर वरदान ही बनता है। विज्ञान विभिन्न परिस्थितियों में जीवनदाता के रूप में भी अपनी भूमिका निभाता है। बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति  का दवाओं से ठीक होना, दुर्घटनाओं के दौरान चोटिल व्यक्ति का उपचार से बचना एवं भीषण दुर्घटनाओं के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगकी की मदद से अनेक लोगों को जीवनदान मिलना विज्ञान के कारण ही संभव हो पाया है। विज्ञान का ऐसा ही चमत्कार 13 अक्तूबर 2010 को चिली की सॉन जोस खदान में भी देखने को मिला। जबकि इस खदान में फंसे 33 मजदूरों को सकुशल निकाल लिया गया और पूरी दुनिया ने इस कार्य के लिए विज्ञान का आभार प्रकट किया।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 47</description>
      <pubDate>Sat, 26 Feb 2011 22:58:59 GMT</pubDate>
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