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    <title>NISCAIR Online Periodicals Repository Collection: VP Vol.59(09) [September 2010]</title>
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      <title>The Collection's search engine</title>
      <description>Search the Channel</description>
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      <title>ब्रेन फिंगरप्रिंटिंग</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/10430</link>
      <description>Title: ब्रेन फिंगरप्रिंटिंग
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: अग्रवाल, जे. एल.
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: मस्तिष्क की भाषा विद्युत तरंगे (एक्शन पोटेंशियल) कहीं जा सकती हैं।  विद्युत तरंगों के माध्यम से मस्तिष्क शरीर के उन विभिन्न भागों से संदेश प्राप्त करता है, निर्देश देता है जिनसे शरीर के विभिन्न अंगों के कार्य नियंत्रित होते हैं। स्नायुओं का आपस में सम्पर्क भी विद्युत तरंगों के माध्यम से होता है जिससे ये आपस में संदेशों का आदान-प्रदान करती हैं। परिणामस्वरूप मस्तिष्क के कार्य संतुलन-सामंजस्य बना रहता है। मस्तिक की विद्युत तरंगों को रिकॉर्ड किया जा सकता है। ये रिकॉर्ड इलेक्ट्रो के इन्फलोग्राम या ई. ई. जी. कहलाते हैं।  ई. ई. जी. में सोते, जागते तथा विभिन्न  कार्य करते समय भिन्न-भिन्न बदलाव होते हैं।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 31-32</description>
      <pubDate>Sun, 29 Aug 2010 22:58:59 GMT</pubDate>
    </item>
    <item>
      <title>नवीन जानकारी</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/10428</link>
      <description>Title: नवीन जानकारी
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: मिश्र, अरविन्द; शुक्ला, आई सी
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: &lt;b&gt;अब वयस्क कोशिकाओं&#xD;
 से भी स्टेम सेल&lt;/b&gt;&lt;b&gt;!&#xD;
 &lt;/b&gt;&lt;br&gt;&#xD;
&#xD;
लगता है स्टेम&#xD;
सेल अनुसंधान ने अब अपनी मंजिल&#xD;
पा ली है। अब भ्रूण कोशिकाओं&#xD;
 के बजाय परिपक्व कोशिकाओं &#xD;
से ही जादुई 'बीज-कोशिकायें&#xD;
यानि स्टेम सेल तैयार करने&#xD;
की प्रविधि आविष्कृत हो चुकी&#xD;
है जिससे मनुष्य की रोग विगलित,&#xD;
टूटी-फूटी&#xD;
कोशिकाओं,&#xD;
ऊतकों की मरम्मत&#xD;
अब आसान है और मानव भ्रूण के&#xD;
नष्ट करने की नैतिक आशंकायें&#xD;
भी अब इस नयी तकनीक की ईजाद से&#xD;
निर्मूल हो चुकी हैं। इस नई&#xD;
तकनीक का नाम है -&#xD;
उत्प्रेरित&#xD;
बहुउद्देश्यीय क्षम जादुई-बीज&#xD;
कोष प्रविधि अर्थात् Induced&#xD;
Pluripotent stem cells (iPScs Technique)&#xD;
जिसमें शरीर&#xD;
की परिपक्व कोशिकाओं  जैसे&#xD;
त्वचा की कोशिकाओं  को ही&#xD;
बीज-कोशाओं&#xD;
 (स्टेम&#xD;
सेल्स)&#xD;
में बदल दिया&#xD;
जाता है। इस नई तकनीक से विकसित&#xD;
'स्टेम&#xD;
सेल मनुष्य की किन्हीं भी 220&#xD;
कोशा प्रकारों&#xD;
में तब्दील होने की क्षमता&#xD;
रखती हैं। वैज्ञानिक यह समझने&#xD;
की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर&#xD;
'जैव&#xD;
घड़ी की वह कौनसी प्रक़्रिया&#xD;
है जिससे मनुष्य की परिपक्व&#xD;
कोशिकायें भी अपनी भ्रूणावस्था&#xD;
की ओर लौट चलती हैं और फिर किसी&#xD;
भी दूसरी कोशा स्वरूप/ऊतक&#xD;
प्रकार में तब्दील होने की&#xD;
क्षमता (Pluripotency)&#xD;
से लबरेज हो&#xD;
उठती हैं।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 41</description>
      <pubDate>Sun, 29 Aug 2010 22:58:59 GMT</pubDate>
    </item>
    <item>
      <title>नई सुबह</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/10427</link>
      <description>Title: नई सुबह
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: मिश्र, अभिषेक
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: नया&#xD;
वायरस मानो सारी मानवता को&#xD;
ही लील लेने पर आमादा था। यह&#xD;
कहाँ जन्मा,&#xD;
इसे लेकर तमाम&#xD;
अटकलें लगाई  जा रही थीं,&#xD;
मगर चिंता की&#xD;
बात इसके फैलाने के तरीके को&#xD;
लेकर थी। यह वायरस सबसे पहले&#xD;
घरेलू पशुओं को प्रभावित कर&#xD;
रहा था,&#xD;
और जब तक कि&#xD;
इनमें इसके लक्षण पहचाने जा&#xD;
पाते यह मनुष्यों तक अपनी पैठ&#xD;
बनाने में सफल हुए जा रहा था।&#xD;
जाहिर है,&#xD;
बच्चे ही इस&#xD;
वायरस के सबसे आसान शिकार बनते&#xD;
थे। बच्चों की जीवाणु प्रतिरोधक&#xD;
क्षमता कम होना भी इस वायरस&#xD;
का बच्चों में ज्यादा तेजी&#xD;
से सक़्रिय होने की एक बड़ी वजह&#xD;
थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन&#xD;
ने इस वायरस के मनुष्य से मनुष्य&#xD;
में फैलाने की संभावना की भी&#xD;
चेतावनी जारी कर दी थी। पालतू&#xD;
पशुओं से संक़्रमित होने की&#xD;
वजह से यह 'पेट्स&#xD;
अफेक्टिंग वायरस के नाम से&#xD;
चर्चित हो गया था।  &lt;br&gt;&#xD;
&#xD;
डॉ.&#xD;
स्वराज दीक्षित,&#xD;
जो एक वरिष्ठ&#xD;
जीवरसायन विज्ञानी थे,&#xD;
इस घटनाक़्रम&#xD;
पर गहराई से नजर रखे हुए थे।&#xD;
उन्हें इस बात की संतुष्टि&#xD;
थी कि भारत अब तक इस वायरस के&#xD;
प्रभाव से मुक्त था। विदेश&#xD;
यात्राओं से लौटने वाले एक-दो&#xD;
यात्रियों पर इस वायरस से&#xD;
प्रभावित होने की संभावना&#xD;
नजर आने पर उनकी प्रारंभिक&#xD;
जांच करवाए जाने के परिणाम&#xD;
भी नकारात्मक निकल रहे थे।&#xD;
यद्यपि ये संकेत राहत का एहसास&#xD;
तो दे रहे थे मगर वर्तमान&#xD;
परिस्थितियों के मद्देनजर&#xD;
निश्चिन्त भी नहीं रहा जा सकता&#xD;
था।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 39-40</description>
      <pubDate>Sun, 29 Aug 2010 22:58:59 GMT</pubDate>
    </item>
    <item>
      <title>चिकित्सा विज्ञान की आधुनिकतम खोजें</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/10426</link>
      <description>Title: चिकित्सा विज्ञान की आधुनिकतम खोजें
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: गुप्ता, विनोद
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: &lt;b&gt;गोली&#xD;
देगी &lt;/b&gt;&lt;b&gt;100&#xD;
&lt;/b&gt;&lt;b&gt;साल&#xD;
का जीवन &lt;/b&gt;&lt;BR&gt;&#xD;
&#xD;
&#xD;
अब&#xD;
एक ऐसी गोली बनाई जा रही है जो&#xD;
आपको 100&#xD;
साल से अधिक&#xD;
समय तक जिंदा रख सकेगी। इसे&#xD;
विकसित कर रहे वैज्ञानिकों&#xD;
का दावा है कि यह गोली लेने से&#xD;
मनुष्य 100&#xD;
साल से ज्यादा&#xD;
समय तक स्वस्थ जीवन जी सकेगा।&#xD;
कुछ समय पहले तीन जीन खोजे गए&#xD;
थे। इनमें दो जीन दिल की बीमारी&#xD;
व स्ट्रोक होने से बचाते हैं।&#xD;
वहीं तीसरा जीन डायबिटीज के&#xD;
खतरे को कम करता है। यह गोली&#xD;
इन तीन जीनों जैसा प्रभाव पैदा&#xD;
करेगी। गोली का परीक्षण तीन&#xD;
साल बाद शुरू हो जाएगा।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 37-38</description>
      <pubDate>Sun, 29 Aug 2010 22:58:59 GMT</pubDate>
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