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    <title>NISCAIR Online Periodicals Repository Community: VP Vol.59 [2010]</title>
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      <title>The Community's search engine</title>
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      <title>विज्ञान और तकनीक की देन : टिलटिंग ट्रेन</title>
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      <description>Title: विज्ञान और तकनीक की देन : टिलटिंग ट्रेन
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: चन्द्र, विमलेश
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: विश्व में अनेक प्रकार की रेलगाड़ियां या ट्रेनें विभिन्न तकनीकों के आधार पर चलती हैं जैसे कि ईंधन के आधार पर भाप, डीजल, बिजली तथा गैस पर चलने वाली रेलगाड़ियां, चुम्बक के आधार पर मैगलेव ट्रेन, पर्वतों पर चलने वाली विभिन्न तकनीकों वाली पर्वतीय ट्रेन, डीजल तथा बिजली से चलने वाली हाइब्रिड इंजन ट्रेन, समुद्रों में चलने वाली समुद्री ट्रेन, महानगरों में तेज गति से चलने वाली मेट्रो ट्रेन, जमीन के अन्दर चलने वाली अण्डर ग्राउण्ड ट्रेन, आकाश या वायु में चलने वाली या लटककर चलने वाली मोनोरेल, सड़कों पर डीजल या बिजली से चलने वाली ट्रॉम ट्रेन, बिना ड्राइवर के चलने वाली ड्राइवरलेस ट्रेन, स्टील के रस्सों से चलने वाली केबिल ट्रेन या फ्यूनीकुलर ट्रेन, गैसों से चलने वाली गैस टरबाइन या बायोगैस ट्रेन, सुरंगों या ट्यूब में चलने वाली ट्यूब ट्रेन, तेजगति से चलने वाली जापान की बुलेट ट्रेन तथा इसी प्रकार अन्य तकनीकों पर विश्व की अनेक रेलगाड़ियां अपनी उच्च गति से चलती हैं। इन रेलगाड़ियों के विचित्र संसार में ऐसी अनेक रेलगाड़ियां भी हैं जो न केवल अपनी तेज गति, आरामदायक सुविधाओं, संरक्षा, यातायात के विश्वसनीय साधन के रूप में विश्व विख्यात हैं, बल्कि अपनी परिचालन तकनीक के कारण विज्ञान और इंजीनियरिंग की एक अनुपम देन के रूप में भी जानी जाती हैं। इन्हीं ट्रेनों में से एक ट्रेन है "टिलटिंग ट्रेन"। जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि यह ट्रेन टिलटिंग या झुकी हुई ट्रेन है। इस प्रकार की रेलगाड़ियां, रेलमार्ग में घुमाव या मोड़ आने पर उस स्थान पर एक तरफ झुक जाती हैं या तिरछी हो जाती हैं तथा घुमाव या मोड़ खत्म हो जाने पर सामान्य रेलगाड़ियों की तरह चलने लगती हैं। ये रेलगाड़ियां अधिकतम 10डिग्री तक झुक सकती हैं।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 53-62</description>
      <pubDate>Sun, 28 Nov 2010 22:58:59 GMT</pubDate>
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      <title>उपग्रह आधारित मौसम विज्ञान सेवा के 50 वर्ष</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/12565</link>
      <description>Title: उपग्रह आधारित मौसम विज्ञान सेवा के 50 वर्ष
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: शंकर, काली
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: सामाजिक और आर्थिक विकास में विश्वसनीय तरीके से मौसम का पूर्वानुमान अत्यन्त महत्वपूर्ण बात होती है। जब से मानव समाज परिवर्तनीय और अत्यधिक गतिजता वाले वायुमंडल के प्रति आकर्षित हुआ तब से उसने मौसम को समझने के लिए अनेक प्रयास किये तथा अनेक तकनीक विकसित कीं। उपग्रहों द्वारा मौसम को समझने की प्रक्रिया ने मौसम भविष्यवाणी प्रक्रिया को एक नया आयाम दिया है। इससे ग्लोबल आधार पर मौसम की भविष्यवाणी करना आसान हो गया। आज से 50 वर्ष पहले प्रथम मौसम विज्ञानी उपग्रह टाइरस-1 (टेलीविजन इन्फ्रारेड प्रेक्षण उपग्रह) का प्रमोचन 1 अप्रैल 1960 को फ्लोरिडा के केप केनेवेरल स्थान से थोर-एबुल रॉकेट द्वारा किया गया था। इसे उपग्रह आधारित मौसम विज्ञानी सेवा का प्रारंभ कहा जाता है। वैसे तो मौसम विज्ञानी वेनगार्ड-2 था जिसका प्रमोचन 17 फरवरी 1959 को किया गया था। तथा उसका डिजाइन बादलों के आवरण (क्लाउड) के मापन के लिए किया गया था। लेकिन इसका अक्षीय घूर्णन उतना अच्छा न होने के कारण इससे आशा के अनुरूप उपयोगी डाटा नहीं इकट्ठा किया जा सका। 270 पौन्ड भार वाले प्रथम मौसम विज्ञानी उपग्रह टाइरस-1 का डिजाइन अंतरिक्ष से बादलों का आवरण का ।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 47-50</description>
      <pubDate>Sun, 28 Nov 2010 22:58:59 GMT</pubDate>
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      <title>आवर्त सारणी का नवीनतम सदस्य</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/12564</link>
      <description>Title: आवर्त सारणी का नवीनतम सदस्य
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: दुबे, अरविन्द
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: सन् 1869 में जब रूसी रसायनज्ञ दिमित्री इवानोविच मेंडलीव ने तब तक ज्ञात 63 तत्वों को उनके परमाणु भार के क्रम में सजाने के लिए अपनी आवर्त सारणी (पीरियोडिक टेबल) की रचना की तो इसमें उनका ध्यान तत्वों के परमाणु भार की अपेक्षा उनके रसायनिक गुणों पर अधिक था। आज की प्रचलित आवर्त सारणी से जब हम मेंडलीव की आवर्त सारणी की तुलना करते हैं तो पता लगता है कि मेंडलीव ने अपनी कुशल सूझ-बूझ से अनजाने में ही तत्वों को उनके परमाणु क्रमांक के अनुसार व्यवस्थित कर दिया था। ऐसा करते समय उन्हें लगा कि आवर्त सारणी में कुछ स्थान ऐसे भी आते हैं जहां सारणी का क्रम टूटता है। इस बात ने मेंडलीव को बहुत समय तक उलझाए रखा। उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि ऐसा क्यों होता है? अंततः उन्होंने एक निष्कर्ष निकाला। उन्हें लगा कि जहां सारणी का क्रम टूटता है, वहां पर निश्चय ही कोई और तत्व होना चाहिए था जिसकी जानकारी शायद अभी किसी को नहीं है। अतः उन्होंने ऐसे स्थानों के लिए "मिसिंग एलीमेन्ट्स" की भविष्यवाणी की। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर रखे जाने वाले तत्वों की अभी खोज होनी बाकी है। यही नहीं, उन्होंने इन अनजाने तत्वों के गुणों की भी भविष्यवाणी कर दी थी।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 45-46</description>
      <pubDate>Sun, 28 Nov 2010 22:58:59 GMT</pubDate>
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      <title>विज्ञान साहित्य परिचय</title>
      <link>http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/12563</link>
      <description>Title: विज्ञान साहित्य परिचय
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 35-42</description>
      <pubDate>Sun, 28 Nov 2010 22:58:59 GMT</pubDate>
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