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    <title>NISCAIR Online Periodicals Repository Collection: VP Vol.59(10) [October 2010]</title>
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    <title>The Collection's search engine</title>
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    <title>पक्षियों का प्रवास</title>
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    <description>Title: पक्षियों का प्रवास
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: गोरे, मनीष मोहन
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: जान शरद ऋतु खंजन आए,&#xD;
पाई समय जिमि सुकृति सुहाए।&#xD;
रामचरित मानस की उपरोक्त पंक्तियों में खंजन पक्षी के प्रवास के बारे में उल्लेख करके तुलसीदासजी ने यह स्पष्ट किया है कि बाहर से आने वाले प्रवासी पक्षियों की जानकारी लोकमानस में बहुत पहले से रही है। नीले गगन में पक्षियों की स्वछंद उड़ान सदियों से हम मनुष्यों को लुभाती रही है। ये आसमान के रंग-बिरंगे यायावर प्राचीन काल से कवियों और लेखकों को आकर्षित करते रहे हैं। प्राचीन भारतीय वांग्मय पक्षियों के वर्णनों से भरे पड़े हैं। भारतीय ग्रंथों के अतिरिक्त दुनिया के अन्य देशों के प्राचीन साहित्यों में भी प्रवासी पक्षियों का उल्लेख मिलता है।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 55-59</description>
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  <item rdf:about="http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/11268">
    <title>सर्प दंश :  सिरिंज विधि से प्राथमिक उपचार</title>
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    <description>Title: सर्प दंश :  सिरिंज विधि से प्राथमिक उपचार
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: विजयवर्गीय, दिनेश
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: वर्षा ऋतु में लगने वाली रिमझिम जहां धरती को हरा-भरा कर शीतलता प्रदान करती है वहीं पहाड़ों पर कल-कल बहते झरने और लबालब बहने वाले नदी-नाले हमारे मन को मस्त-मस्त कर जाते हैं। गांव-गांव में खुशहाली का संदेश दे जाने वाली वर्षा का लोग दिल से स्वागत करते हैं। ऐसे में हमारे किसान भी खेतों में हरी-भरी फसल की आशा में पूरे समर्पित भाव से जुड़े रहते हैं।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 51</description>
  </item>
  <item rdf:about="http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/11267">
    <title>संकट में वनराज</title>
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    <description>Title: संकट में वनराज
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: भट्ट, संदीप
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: भारत के जंगलों का राजा 'बाघ' अब आतंक के साये में जीने को मजबूर है। एक समय वनों में स्वतंत्र विचरण करने वाले वनराज आज संकट में हैं। अंधाधुंध वनों की कटाई, लगातार बढ़ रहे अवैध शिकार और छोटे होते जा रहे जंगलों ने बाघों को खतरे में डाल दिया है। आज राजा की सारी प्रजाति के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। वर्ल्ड वाइड फंड और कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों समेत तमाम दुनिया के वन्यजीव प्रेमियों ने इस पर खासी चिंता जाहिर की है। पर्यावरणविद् मानते हैं कि अगर बाघों का सफाया इसी तरह से होता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब बाघों के किस्से सिर्फ किताबों में ही मिल सकेंगे।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 47-48</description>
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  <item rdf:about="http://nopr.niscair.res.in/handle/123456789/11266">
    <title>एस्ट्रोटर्फ</title>
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    <description>Title: एस्ट्रोटर्फ
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Authors: मिश्र, विनोद कुमार
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Abstract: फुटबॉल, हॉकी, बेस बॉल जैसे खेल सदियों से खुले मैदानों में खेले जाते हैं। मैदान में उगने वाली घास इस खेल में सहायक होती है तथा इससे खेल और अधिक मनोरम हो जाता है। पर प्राकृतिक रूप से उगने वाली घास हर जगह उपलब्ध नहीं होती है। इसमें एकरूपता भी नहीं होती है। कहीं पर जमीन रेतीली होती है तो कहीं पर बर्फ पड़ने के कारण हरियाली लंबे समय तक नहीं उगती है। जमीन भी कड़ी हो जाती है। इससे गेंद अधिक उछाल मारती है।
&lt;br/&gt;
&lt;br/&gt;Page(s): 45</description>
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